Author: Gopal Goswami

  • Ethnic Nationalism can Break China – Organiser

    china’s biggest weakness is its autocracy and now the people are fed-up with the curbs on their fundamental rights. it’s time the ethnic nationalism movement to usher in to end this over 100 years long oppression of more than 1.5 billion people

    — Read on www.organiser.org/Encyc/2020/8/25/Ethnic-Nationalism-can-Break-China.html

  • How Delhi-Mumbai industrial corridor will be game-changer – The Daily Guardian

    How Delhi-Mumbai industrial corridor will be game-changer – The Daily Guardian
    — Read on thedailyguardian.com/how-delhi-mumbai-industrial-corridor-will-be-game-changer/

    Delhi-Mumbai industrial corridor will be game-changer in post COVID-19, if proper leadership is entrusted upon this task.

    My article in today’s

    @DailyGuardian1

  • MyIndMakers

    MyIndMakers enables the exchange of Global Ideas and Solutions from India. All day news updates related to Business, Hindu, Hinduism, India, Indic, Culture, Travel, Religion, Politics, Foreign Policy, Modi, Swami, BJP, Congress, Trump, Biden, Israel, Jihad, Christianity, China, Japan, Book Reviews, Movie Reviews, Indian Artciles, Blogs, Interviews, Podcasts, Videos, MyIndBook, MyIndMakers, myind.net
    — Read on myind.net/Home/viewArticle/what-if-biden-wins-the-next-white-house-race/

  • विविध रूपों में, अनेकों देशों, अनेकों भाषाओं में राम कथा का प्राप्त होना ही ये सिद्ध करता है कि राम पूरे विश्व के है और उनकी कीर्ति अपार है।

    विश्व में अनेक देशों में रामायण के अलग अलग स्वरूप मिलते हैं। वाल्मीकि रामायण
    आनंद रामायण
    वशिष्ठ रामायण
    याज्ञवल्क्य रामायण
    रामचरितमानस
    कंब रामायण,
    कृत्तिवास रामायण,
    अद्भुत रामायण, तत्वार्थ रामायण, संजीवनी रामायण, सर्वार्थ रामायण, उत्तर रामचरितम्, प्रतिमानाटकम्, राघवेन्द्र चरितम्, हनुमन्नाटकम्, रघुवंशम, अभिषेक नाटकम्, जानकी हरणं, राधेश्याम रामायण के अतिरिक्त
    लोमश संहिता में रामायण
    हनुमत् संहिता में रामायण
    शुक संहिता,
    बृहत्कौशल खंड,
    भुशुण्डी रामायण,
    अद्भुत रामायण,
    विलंका रामायण(सारलादास कृतं उड़िया),
    के साथ साथ

    दशरथ जातकम्, अनामक जातकम्, दशरथ कहानम् आदि (बौद्ध ग्रन्थों में रामायण),

    पउमचरिउ(21 ई.), विमलसूरि कृत रामायण(प्राकृत में), रविवेषणाचार्य कृत रामचरित(संस्कृत में), स्वयं भू कृत पउमचरिउ अपभ्रंश (नवम्, 21ई. ), अभिनव पम्पकृत(कन्नड़), रामचन्द्र चरित पुराण(11, 21ई.), गुणभद्र कृत रामायण (संस्कृत) तथा उत्तर पुराण (नवम् -21 ई. ) आदि (जैन ग्रन्थों में रामायण) के साथ साथ-

    हिंदी भाषा में 11, मराठी भाषा में 8, बांग्ला भाषा में 25, तमिल भाषा में 12, तेलगू भाषा में 12 तथा उड़िया लिपि में 6 रामायण प्राप्त हैं।

    “राम चरित शतकोटि अपारा” —-
    सहस्रों करोड़ बार रामायण लिखी-गाई गई है।

    अन्य देशों के उदाहरण देखें तो-

    नेपाल में भानुभक्त कृत ‘नेपाली रामायण’,

    भूटान में पदमपाहुस रामायण

    श्री लंका में कुमार दास रचित “जानकी हरण” रामायण है (512-521ई.) तथा सिंहली भाषा में राम कथा “मलेराज़ की कथा” नाम से 700 bc)थी।

    बर्मा में ‘रामवत्थु’ रामायण है।

    चीन में यूतोकी रामयागन, इंडोचीन क्षेत्र में खमैर रामायण प्राप्त हुई।

    तुर्की में खोतानी रामायण,

    जावा में रामकैलिंग, सेरतराम, सैरीराम नाम से रामायण।

    थाईलैंड में रामकियैन रामायण।

    फिलीपींस की मारनव भाषा मे संकलित ‘मसलादिया लाबन’ है जो विकृत रामायण है।

    इंडोनेशिया में सबसे प्राचीन शास्त्रीय भाषा कावी मे काकावीन द्वारा रचित ‘रामायण काकावीन’है।

    कतर के दोहा में मुगल रामायण नाम से रामायण का अरेबिक अनुवाद जिसे हमीदा बानो ने अनुवाद कराया था, जो 16 मई 1594 को पूर्ण हुआ था।

    मलेशिया के इस्लामीकरण के बाद 1633 में मलय रामायण की सबसे प्राचीन पांडुलिपि बोडलियन पुस्तकालय में संरक्षित कर दी गई थी। मलेशिया में ‘हिकायत सेरीराम’ रामायण है।

    जापान में कथा संग्रह ग्रन्थ ‘होबुत्सुशू’ में राम कथा संकलित है।

    मंगोलिया में अनेक रामायण प्राप्त हुई हैं। मंगोलियन भाषा मे लिखित चार रामायण दम्दिन सुरेन ने खोजी थीं। इनमें ‘राजा जीवक की कथा’ सबसे प्रसिद्ध है। वर्तमान में लेनिनगार्द में मंगोलियन रामायण सुरक्षित हैं।

    तिब्बत में “किंरस-पुंस-पा” नाम से रामायण ।

    इनके अतिरिक्त संसार भर से तीन सौ से अधिक रामायण प्राप्त हुई हैं।
    अन्त में पुनः

    “राम चरित शतकोटि अपारा।
    श्रुति सारदा न बरने पारा ।।”

    विविध रूपों में, अनेकों देशों, अनेकों भाषाओं में राम कथा का प्राप्त होना ही ये सिद्ध करता है कि राम पूरे विश्व के है और उनकी कीर्ति अपार है।

  • Trade restrictions – India’s off Battle-field advantage over China

    https://vskbharat.com/trade-restrictions-indias-off-battle-field-advantage-over-china/?lang=en

    The fresh ban on Chinese apps, restriction in import based on quality issues and barring Chinese firms from infrastructure, projects has put India on top of the off-battle arena for now

    My article in vskbharat.org

    Advantage India
  • राम मंदिर, अयोध्या व भविष्य का भारत

    सिक्ख पंथ के निहंग पहले राम भक्त थे जिन्होंने भगवान राम के मंदिर को मुस्लिम आक्रांताओं की ग़ुलामी से मुक्ति के लिए मस्जिद पर कब्जा किया और राम नाम लिख कर वहाँ त्रिशूल गाड़ दिया था ??

    Organiser weekly में मेरा लेख

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  • संपादक महोदय भगवान् न्याय करते हैं एनकाउंटर नहीं

    संपादक महोदय भगवान् न्याय करते हैं एनकाउंटर नहीं

    गुजराती के एक प्रसिद्द दैनिक में प्रकाशित एक लेख ने बुद्धिजीवी वर्ग के प्रति हिन्दुओं के मन में एक बार पुनः आक्रोश भर दिया है। अपने आप को सेक्युलर व बुद्धिमान दिखाना हो, सस्ती लोकप्रियता प्राप्त करनी हो तो हिन्दू देवी-देवताओं के अपमान में एक लेख लिख दीजिये या हास्य के नाम पर फूहड़ता से संस्कृति का उपहास कर लीजिये। आप को रातों रात कुछ समाचार पत्र व टीवी चैनल प्रसिद्द कर देंगे।  आप जितना भारतीय संस्कृति का उपहास करेंगे, उसे पिछड़ा, रूढ़िवादी कह कर लोगों के सामने रखेंगे आप एक उदारवादी व टीवी मीडिया के चेहते बन जायेंगे।  ऐसी सोच व उसे मान्यता वामपंथी शिक्षा पद्दति से शिक्षित पिछली पीढ़ी को मिली थी। परन्तु सोशल मीडिया के इस युग में अब भारतीय युवा के पास सारी जानकारी उसकी हथेली पर हैं, वह एक मिनट में ही सत्य जान सकता है।  उसे अपने पूर्वजों पर गर्व है, अपने रीती-रिवाजों व कर्म कांडों का वैज्ञानिक महत्व भी विदित है, अतः वामपंथी विचारों के वाहक मीडिया, बुद्धिजीवी, शिक्षाविदों व उनके आकाओं को अब उनकी दुकान चला पाना कठिन हो रहा है।

     

    सन्देश नामक गुजराती दैनिक के संपादक ने ” भारतीय संस्कृति में पहला फेक अन्कॉउंटर भगवान राम ने बाली का किया था ” नामक शीर्षक से इतिहास की कई अन्य  घटनाओं को भी उद्धृत कर अति कुरूपता से उनका चित्रण किया है।  भगवान राम द्वारा बाली के वध को फेक अन्कॉउंटर बताने वाले लोग ही एक आतंकी सोहराबुद्दीन के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने पर पुलिस के कई अधिकारीयों को जेल के पीछे धकेल देते हैं जिससे पुलिस का मनोबल ध्वस्त होता है व उन आतंकियों को हौसला मिलता है ।  भगवान राम ने बाली का वध किया क्योंकि उसने सुग्रीव की पत्नी का हरण कर उसे राज्य से निकाल दिया था।  बाली की अनन्य शक्ति उसको युद्ध में शत्रु की आधी शक्ति दे देती थी इस कारण भगवान राम ने बाली को पेड़ के पीछे से छुप कर मारा, सुग्रीव सत्य के साथ खड़ा था बाली असत्य, इसलिए सत्य का ही साथ देना चाहिए जो भगवान राम ने किया, तो यह फेक एन्काउंटर कैसे हुआ? ये वही लोग हैं जो संसद पर हमला करने वाले अफजल गुरु के शिष्यों की टुकडे टुकड़े गैंग को सही ठहराने व समर्थन में पूरा समाचार पत्र भर देते हैं।

     

    दूसरा उदाहरण लेखक ने गुरु द्रोणाचार्य का दिया है जिनको उसके अनुसार भगवान कृष्ण ने धोखे से मारा। भीम ने हाथी को मारकर गुरु द्रोण के पुत्र अश्वत्थामा के मारे जाने की बात गुरु द्रोण को बताई जिससे उनका मन शोक में घिर गया व कृष्ण ने अर्जुन को बाण चलाने का संकेत किया, गुरु द्रोण की मृत्यु हुई। परन्तु सत्य यह है कि गुरु द्रोण को राज्य धर्म का निर्वाह करते हुए दुर्योधन की सेना में लड़ना पड़ा, गुरु द्रोण जानते थे की यदि युद्ध चलता रहा और वह लड़ते रहे तो पांडव कभी विजयी नहीं होंगे और सत्य पराजित हो जायेगा। गुरु द्रोण यह भी जानते थे अश्वत्थामा चिरंजीवी है उसे कोई नहीं मार सकता। यहाँ संपादक महोदय ने स्थिति का सही विवेचन करने के बजाय भगवान कृष्ण का भी चरित्र हनन करने का प्रयास किया।

     

    तीसरा उदहारण पितामह भीष्म का दिया गया, भगवान कृष्ण ने शिखंडी को उनके सामने खड़ा कर दिया जो पूर्व जन्म में स्त्री था, (यदि भीष्म चाहते तो यह कोई कारण नहीं था क्योंकि शिखंडी इस जन्म में तो पुरुष ही था) जिससे वे अपनी प्रतिज्ञानुसार उसके ऊपर बाण न चला सकें।  परन्तु सत्य यह है कि भीष्म पितामह स्वयं चाहते थे कि पांडवों की विजय हो क्योंकि पांडव सत्य के लिए लड़ रहे थे कौरव असत्य के लिए, राज्य धर्म का पालन करने के लिए कौरवों की सेना के साथ लड़ना उनकी लाचारी थी।  परन्तु जैसे ही सामने शिखंडी के रूप में कारण दृष्टिगोचर हुआ उन्होंने अपने अस्त्र  शस्त्र  रख दिए।  धर्म सत्य के लिए दिए गए स्वयं के ऐसे बलिदानों को हमारे बुद्धिजीवियों ने षड़यंत्र का शिकार घोषित कर उनके त्याग का सत्यानाश कर दिया।

     

    भारत व विश्व में ऐसे ही तथाकथित विद्वानों के निरर्थक विवेचनों ने हमारे धर्म ग्रंथों व इतिहास की घटनाओं को उसके मूल स्वरुप को न समझा कर उसका विकृत रूप प्रस्तुत किया व सनातन हिन्दू समाज को तोड़ने वाली शक्तियों को समर्थ बनाया। यहाँ पितामह भीष्म के सत्य की विजय के लिए किया गया प्राणों का त्याग निरर्थक हो गया व उनको षड़यंत्र के तहत भगवान कृष्ण व पांडवों द्वारा धोखे से मारने की बात को प्रचारित प्रसारित किया गया। गुरु द्रोण जैसे महान गुरु जिन्होंने यह ज्ञात होने के बाद भी कि अश्वत्थामा अमर है चिरंजीवी है शोक दिखा कर अपने शस्त्र रख दिए ताकि धर्म सत्य की विजय हो सके। क्या बिना गुरु द्रोण भीष्म पितामह की मृत्यु के धर्म की विजय संभव थी ?

     

    हमारे वामपंथी इतिहास कारों व सेक्युलर हिन्दू बुद्धिजीवियों ने एकलव्य जैसे महान त्यागी गुरु भक्त शिष्य को भी एक सामान्य बुद्धिहीन जंगली बालक की श्रेणी में ला कर रख दिया।  एकलव्य का स्थान महान शिष्यों में होना चाहिये उसके स्थान पर गुरु द्रोण के द्वारा मूर्ख बनाकर उसकी ऊँगली कटवा लेने का झूठ प्रचारित कर गुरु द्रोण को भी कलंकित किया गया। सत्य यह है कि जब एकलव्य को यह ज्ञात हुआ कि गुरु द्रोण ने अर्जुन को विश्व का श्रेठतम धनुर्धर बनाने का वचन दिया हुआ है, मेरे रहते मेरे गुरु का यह वचन मिथ्या हो जायेगा और उनकी मान प्रतिष्ठा में धूमिल हो जायेगी , उसने अपना अंगूठा काट दिया।  एक शिष्य का इससे बड़ा बलिदान क्या हो सकता था ? उस महान शिष्य को एक बुद्धि-विवेक हीन बालक जो किसी के कहने पर अपना अंगूठा काट देता है के तौर पर प्रसिद्द कर भारत की भोली वनवासी प्रजा को नगरों में रहें वाले अन्य हिन्दुओं के विरुद्ध जहर घोलने में किया गया। 

     

    हिन्दुओं को जात-पात में बाँट कर तोड़ने की यह प्रथा अब इतने गहरे बैठ गयी है कि अभी कुछ दिन पूर्व कानपुर के कुख्यात अपराधी विकास दुबे जिसने ८ पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी, उसको भी मीडिया में बैठे कुछ देश द्रोही एजेंडा चला रहे लोगों द्वारा ब्राह्मणों के ऊपर ठाकुरों द्वारा हो रहे अत्याचार की तरह प्रचारित करने का प्रयास हुआ। एक ठाकुर मुख्यमंत्री द्वारा ब्राह्मण की हत्या बनाकर प्रस्तुत किया गया। अब समय है समाज के विभिन्न प्रभावी स्थानों पर बैठ कर समाज में विष घोल रहे ऐसे बुद्धिजीवियों ,पत्रकारों ,शिक्षा विदों ,फिल्म कलाकारों को आईना दिखाया जाय व उनको समाज के सामने ला कर उनकी पोल खोली जाय। हिन्दू धर्म ग्रंथों को तोड़ मरोड़ कर समाज में विष घोलने का कार्य जब तक बंद नहीं होगा, समाज जाति-धर्म पर बंटा रहेगा व प्रगति में बाधा बना रहेगा।

    हिन्दू धर्म का उपहास करना स्वतंत्रता के बाद से ही एक प्रगतिवादी सोच का प्रमाणपत्र बन गया।  किसी में साहस नहीं है कि वो हर वर्ष ईद पर होने वाले पशुओं के संहार के विरुद्ध लेख लिखे , टीवी पर संवाद करे, मस्जिदों से दिन में पांच बार फैल रहे ध्वनि प्रदूषण के विरुद्द लेख लिखे। ईसाई  मिशनरियों द्वारा भोले आदिवासियों दलित बंधुओं का लालच दे कर करवाये जा रहे धर्मान्तरण के विरुध्द बोले। उनकी छोड़िये ये संपादक महोदय स्वयं ब्राह्मण जाति  का उपनाम अपने नाम के पीछे लगाते हैं, ऐसे हिन्दुओं का क्या करें ?

     

    हिन्दू समाज को अपनी बात स्वयं अपने घरों में अपने बालकों से करना प्रारम्भ करना होगा। उन्हें इतिहास की घटनाओं का सही विवेचन कर बताना होगा। हिन्दू केवल धन के पीछे भागेगा तो अपने संतानों को सांस्कृतिक रूप में खो देगा और एक दिन उसके बच्चे उससे उसका असली पिता होने के प्रमाण मांगे तो  आश्चर्य नहीं होना चाहिए। कोरोना महामारी ने हमें बता दिया है कि पैसा, शान-शौकत, सभी यहीं रह जायेगा, अब तो कोई शमशान तक भी साथ नहीं आता। परिवार के साथ समय बिताएं, इन विषयों पर उन्मुक्त चर्चा करें, अच्छे विचार सुने व सुनाएँ, धार्मिक व अच्छी पुस्तकों का वांचन करें। अपने धर्म इतिहास के ग्रन्थ घर में लाएं, सबके साथ उनका पठन-पाठन करें। अपनी इस महान थाती को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का नैतिक दायित्व हम पर है, जैसे उसे हमारे पुरखों ने हम तक पहुंचाया था।  नहीं तो इस प्रकार के लेख लिखे जाते रहेंगे, हमारे बच्चों अगली पीढ़ी को भ्रमित करते रहेंगे और यह महान संस्कृति नष्ट हो जाएगी। 

     

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